Thursday, December 20, 2018

ما هي الأضرار التي يسببها الطعام الذي تتناوله لكوكبنا؟

ولا يقل عن ذلك أهمية معرفة أين تنتج الأطعمة التي تتناولها والكيفية التي تنتج بها، إذ يمكن أن تكون لنفس المواد الغذائية فروق كبيرة في تأثيرها البيئي.
فعلى سبيل المثال، تسبب الماشية التي ترعى على أراضي الغابات المزالة من الغازات المسببة للاحتباس 12 ضعف الماشية التي ترعى في الحقول الطبيعية.
وتؤدي لحوم البقر العادية المنتجة في أمريكا اللاتينية إلى انبعاث 3 أضعاف كميات الغازات المسببة للاحتباس التي تعزى للحوم البقر وليست اللحوم والألبان المواد الغذائية الوحيدة التي قد تؤدي خياراتك بشأنها إلى فروق كبيرة.
فالشوكولاته والقهوة المنتجة في أراضي الغابات المطرية المزالة تنتج كميات أكبر نسبيا من الغازات المسببة للاحتباس.
لأجل أن تتأكد من أن الطماطم التي تتناولها منتجة بأسلوب أكثر رفقا بالبيئة، أختر تلك التي تزرع في الهواء الطلق أو في البيوت الزجاجية ذات التقنيات المتطورة، بدلا من تلك التي تزرع في البيوت الزجاجية التي تستخدم النفط أو الغاز في تدفئتها. أما شاربو البيرة الذين يهتمون بالبيئة أيضا، فقد يهمهم أن يعرفوا بأن البيرة التي تقدم بواسطة المضخات (درافت) مسؤولة عن انتاج كميات أقل من الانبعاثات من تلك المعبأة في قناني زجاجية أو عبوات معدنية.
وحتى أكثر خيارات اللحوم رفقا بالبيئة تنتج من غازات الاحتباس كميات أكبر مما تنتجه مصادر البروتينات النباتية كالبقول والمكسرات.
درس كل من جوزف بور، الباحث في جامعة أكسفورد، وتوماس نيميتشيك، الباحث في قسم البيئة والبيئة الزراعية في زوريخ بسويسرا التأثيرات البيئية لـ 40 منتجا غذائيا رئيسيا تمثل الجزء الأكبر من الأطعمة المتناولة حول العالم.
وقدّر العالمان تأثيرات هذه المواد على انبعاثات الغازات المسببة للاحتباس وكميات المياه ومساحات الأراضي المستخدمة في كل مراحل انتاجها بما في ذلك عمليات المعالجة والتعليب والنقل.
وتمكن بور ونيميتشيك، بعد أن حللا المعلومات التي اتيحت لهما من 40 ألف مزرعة تقريبا و1600 مصنعا للمعالجة والتعليب اضافة الى عدد كبير من البائعين، من تقدير كيف أن لأساليب الانتاج والمواقع الجغرافية المختلفة تأثيرات مختلفة جدا على صحة الكوكب.
أحجام الوجبات بموجب هذين المعيارين أصغر في أغلب الأحيان من الوجبات المقدمة في المطاعم أو تلك التي يتوقعها الناس عموما، ولذا فالأرقام التي تنتجها الحاسبة حول تأثير الاستهلاك الشخصي للأفراد أقل من الحقيقة على الأرجح.
استخدمت في تقدير تأثير الأطعمة الغنية بالبروتينات نتائج دراسة بور ونيميتشيك لتأثير 100 غم من البروتين، اضافة إلى الأرقام التي تعتمدها جمعية التغذية البريطانية لكمية البروتينات في الوجبة الواحدة، وذلك لتجنب الفروق بين الأطعمة والمطبوخة وغير المطبوخة.
تقاس انبعاثات الغازات المسببة للاحتباس الحراري بالكيلوغرامات من الغازات المعادلة لثاني أكسيد الكربون ( CO2eq). تحول هذه الوحدة تأثيرات غازات الاحتباس المختلفة -
يقدر التأثير السنوي لتناول طعام معين بضرب تأثير وجبة واحدة من ذلك الطعام في عدد الوجبات المتناولة في سنة اعتمادا على التقديرات التي يدلي بها المستخدم اسبوعيا.
وتقارن هذه الأرقام بالانبعاثات المتأتية عن النشاطات اليومية الأخرى. وحسب تقدير وكالة البيئة الأوروبية، فإن قيادة سيارة تعمل بالبنزين العادي تنتج 392 غراما من معادل ثاني أكسيد الكربون ( CO2eq) في الميل الواحد في فترة عمرها بما في ذلك الانبعاثات المتأتية عن عمليات صنع السيارة وتكرير الوقود وانبعاثات عادمها لكل ميل.
ومن الأرقام الأخرى المثيرة للاهتمام، تلك القائلة إن تدفئة منزل عادي في بريطانيا تنتج 2,34 طنا من الغازات المعادلة لثاني أكسيد الكربون ( CO2eq) سنويا، وذلك حسب معلومات لجنة التغير المناخي في بريطانيا، بينما يبلغ حجم البصمة الكربونية لمسافر واحد في رحلتي ذهاب وأياب بالطائرة بين لندن وملغا في اسبانيا حوالي 320 CO2eq اعتمادا على أرقام   .
أما بالنسبة لمساحات الأراضي، فمساحة الأرض المستخدمة لانتاج الاستهلاك السنوي لكل من الأطعمة قورنت بمساحة ملعب تنس (261 مترا مربعا).
وأخيرا، نأتي إلى تقدير كميات المياه المستخدمة، ومقارنة ذلك بالمياه التي يستخدمها الفرد في أخذ دوش، وذلك اعتمادا على فرضية تقول إن الدوش الواحد يستغرق بالمعدل 8 دقائق ويستخدم نحو 65 لترا من الماء. ولم تحتسب في الأرقام إلا "المياه الزرقاء،" أي تلك التي يكون مصدرها الأنهار أو جوف الأرض.
كالميثان وأكسيد النيتروجين - إلى ما يعادلها حجما من غاز ثاني أكسيد الكربون.
المنتجة في أوروبا، وتستخدم عشرة أضعاف مساحات الأرض من أجل ذلك

Monday, November 12, 2018

पहले चरण के मतदान की बड़ी बातें

पहले चरण के मतदान की बड़ी बातें

  • आज पहले चरण में छत्तीसगढ़ की 90 में से 18 सीटों पर मतदान
  • नक्सल प्रभावित 18 सीटों पर हैं 31 लाख वोटर
  • बस्तर जिले की 12 और राजनांदगांव की 6 सीटें शामिल
  • नक्सली हिंसा के खौफ से संगीनों के साये में वोटिंग जारी
  • सीएम रमन सिंह, करुणा शुक्ला, कवासी लखमा जैसे दिग्गजों की किस्मत दांव पर
  • 2013 चुनाव में इन 18 सीटों में से 12 पर कांग्रेस ने जमाया कब्जा, 6 भाजपा के खाते में

पहले चरण के मतदान का लाइव अपडेट : 

-दोपहर तीन बजे तक 47.18 फीसदी मतदान।-छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 10 सीटों पर मतदान 3 बजे खत्म हो गया है। बाकी 8 सीटों पर मतदान जारी है जो शाम पांच बजे तक चलेगा। पहले चरण की 10 सीटों पर आज सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ जबकि आठ सीटों पर एक घंटे बाद आठ बजे से मतदान प्रारंभ हुआ। नक्सल प्रभावित मोहला-मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कांकेर, केशकाल, कोण्डागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोण्टा में सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ और दोपहर तीन बजे खत्म हो गया।

-वहीं विधानसभा क्षेत्र खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, डोंगरगांव, खुज्जी, बस्तर, जगदलपुर और चित्रकोट में सुबह आठ बजे मतदान शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक मतदान होगा। राज्य की जिन 18 सीटों के लिये आज मतदान हुआ उसमें से 12 बस्तर क्षेत्र की और छह सीटें राजनांदगांव जिले की हैं। इन 18 विधानसभा सीट के लिए कुल 190 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला यहां के 31,80,014 मतदाता कर रहे हैं। 
 
- दंतेवाड़ा के मडेंडा गांव के लोगों ने बढ़चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। यहां नक्सलियों ने ग्रामीणों को धमकी दी थी कि उंगलियों पर स्याही का निशान देखा, तो उनकी अंगुली काट देंगे। स्थानीय लोगों ने कहा, "गांव में 263 पंजीकृत मतदाता हैं और धमकी के बाद भी कई लोग मतदान कर रहे हैं।"
  # - एएनआई के मुताबिक पहले चरण की वोटिंग में दोपहर एक बजे तक 25.15 फीसदी मतदान हुआ।

- बीजापुर के पामेड़ इलाके में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सुरक्षा दस्ता कोबरा के दो कमांडो घायल हुए। बीजापुर एसपी ने कहा है कि घटनास्थल के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल रवाना कर दिया गया है। - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ चुनाव के पहले चरण के मतदान के दिन बिलासपुर में एक चुनावी सभा को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा, "विपक्ष अभी भी नहीं जानता कि भाजपा से कैसे लड़ना है। हमारा ध्यान विकास पर केंद्रित है, हम जातीय भेदभाव पर ध्यान नहीं देते। आप छत्तीसगढ़ में जहां भी जाएंगे, विकास को देख सकते हैं।" :

भेल ने तेलंगाना में 120 मेगावाट क्षमता की पनबिजली इकाई चालू की

सार्वजनिक क्षेत्र की भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) ने तेलंगाना में पुलिचिंतला पनबिजली परियोजना की 30 मेगावाट क्षमता की चौथी और अंतिम इकाई चालू कर दी है। इसके साथ 120 मेगावाट क्षमता (30-30 मेगावाट की चार इकाई) की इकाइयां पूरी तरह चालू हो गयी है।
कंपनी ने सोमवार को एक बयान में कहा कि भेल ने इससे पहले, 30-30 मेगावाट की तीनों इकाई चालू की थी। तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में स्थित यह परियोजना तेलंगाना स्टेट पावर जनरेशन कारपोरेशन लिमिटेड( टीएसजीईएनसीओ) ने कृष्णा नदी पर लगायी है। पुलिचिंतला पनबिजली परियोजना से गैस उत्सर्जन में कमी आएगी और कम कार्बन उत्सर्जन वाले विकास रास्ते को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

कंपनी के अनुसार परियोजना के लिये उपकरण भेल के भोपाल, झांसी, रूद्रपुर और बेंगलुरू स्थित कारखानों में बनायी और आपूर्ति की गयी। भेल ने तेलंगाना में अबतक कुल 1,073 मेगावाट क्षमता की पनबिजली परियोजनाएं चालू कर चुकी है। दिल्ली के अशोका रोड पर स्थित पांच सितारा होटल रॉयल प्लाजा की पहली मंजिल पर आग लगने से अफरा तफरी मच गई। यह घटना सोमवार दोपहर की है।जानकारी के अनुसार होटल में पूजा के स्थान पर आग लगी थी। आग लगते ही इसकी सूचना फायर ब्रिगेड और पुलिस को दी गई। जानकारी मिलने पर फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंची हैं और आग पर काबू पा लिया गया है।

हालांकि अभी इस बात का पता नहीं चल सका कि होटल में आग कैसे लगी। अभी किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने कहा कि उसने पहले ही अपीलों को जनवरी में उचित पीठ के पास सूचीबद्ध कर दिया है।

अखिल भारतीय हिंदू महासभा की ओर से शीघ्र सुनवाई के संबंध में अधिवक्ता बरूण कुमार के अनुरोध को खारिज करते हुए पीठ ने कहा, 'हमने आदेश पहले ही दे दिया है। अपील पर जनवरी में सुनवाई होगी। अनुमति ठुकराई जाती है।'

बता दें इससे पहले अयोध्या राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई जनवरी तक के लिए टाल दी थी और कहा था कि मामले पर नियमित सुनवाई पर फैसला भी अब जनवरी में ही होगा।

मामले पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गैयूरुल हसन रिजवी का कहना है कि विवादित स्थान पर राम मंदिर बनना चाहिए ताकि देश का मुसलमान सुकून, सुरक्षा और सम्मान के साथ रह सके। उन्होंने आगे कहा कि देश में शांति और भाईचारा मजबूत हो सके इसके लिए कोर्ट को जल्द फैसला करना चाहिए।

गौरतलब है कि अयोध्या मामले पर कुछ मुस्लिम संगठनों ने आयोग को एप्लीकेशन दी है। साथ ही इस मामले में आयोग से पहल करने की भी मांग की है। इन एप्लीकेशन पर आयोग 14 नवंबर को होने वाली मासिक बैठक में विचार करेगा। जिसके बाद आयोग सुप्रीम कोर्ट से मामले पर जल्द सुनवाई करने को भी कहेगा।

Wednesday, October 10, 2018

加拿大森林大火:气候变化恐是罪魁祸首

二,一场前所未有的五月森林大火席卷了加拿大艾伯塔省的麦克莫里堡市,当地不得不进行了该省有史以来最大规模的人员疏散。高温大风加剧了火势蔓延,风向在最后一分钟改变了方向,才使得石油重镇麦克莫里堡的大部分地区免于被大火吞噬。

此前,北半球大陆北部边界沿线已多次出现
森林火警险情,而人们认为这可能与全球气候变化有关。由于地球不断变暖,随着春季积雪融化,温度上升,类似这样的火灾会越来越多,严重程度也会越来越高。

2016年5月3日,加拿大艾伯塔省麦克莫里堡市南部的一处工业区,大火正在熊熊燃烧。(加拿大广播公司新闻提供,路透社发布)

艾伯塔大学森林火灾研究员麦克·弗兰尼根(  )说:“我们曾预测,人为原因导致的气候变化将影响林火动态,这次的大火恰好证明了这一点。”

上周二,大火开始自西向东肆虐,艾伯塔北部总面积6.1万平方公里的麦克莫里堡市至少有一个街区已夷为平地。当地气温更是直逼90华氏度——较往年同期高了40华氏度(22摄氏度)——而当天下午的大风则加剧了火情蔓延。火灾过境之处仿佛世界末日一般,林木好像被点着的火柴或者闪烁的急救灯,城内及周边 8万居民仓皇向南向北撤离。

出入城区只有一条路,路两边火光四起,浓烟滚滚,遮天蔽日,人们白天驾车逃离却感觉像是在黄昏。


《环球邮报》记者在麦克莫里堡市邻近的榭湖镇疏散中心遇到了逃难的丹·比克福德(  ),他说:“当时烟简直太大了,坐在车里向外看,能见度都不到两英尺。”

这样的撤离场景让我们想起了去年美国加利福尼亚州米德尔顿的河谷大火。那次灾难的起因跟麦克莫里堡类似,最终造成加州湖区县和索诺玛县等地约2000多幢房屋被毁。尽管麦克莫里堡居民受灾程度也很严重,但好在目前为止尚无人员死亡报告。

麦克莫里堡市消防队长达比·艾伦(  )接受加拿大广播公司采访时表示,这周二是他职业生涯中最黑暗的一天。虽然具体损毁程度还有待统计,但初步报告显示,其中一个街区的居民房屋有八成已经被毁。由于高温干旱天气还将持续,预计周三火情仍然难以缓解。

麦克莫里堡发生的这一切恰好证明了气候变化对森林野火季节的影响。去年冬季降水不足,积雪过少且在春季温度上升后迅速消融,给野火肆虐留下了充足的“沃土”。此外,这周的气温也远高于常年同期水平。现在你应该了解到气候变化是如何影响森林火情的了。不仅是艾伯塔省,北半球大陆北部边界地区都是如此。

过去1万年里,北方针叶林
发生的火灾达到了前所未有的程度。美国气候中心一项针对阿拉斯加州森林火情的研究显示,去年该地区森林野火季节时长比65年前增加了40%。同期大型山火的数量也翻了一倍。

研究员弗兰尼根表示,现在加拿大森林野火季节要比以前提早一个月,而且自1970年以来,年均过火面积也增加了一倍。

气候变化使环境条件发生了改变。今年的这次厄尔尼诺现象也可能在这次严峻的加拿大西部森林野火季节“开场”中发挥了作用。之前1997年到1998年的那次厄尔尼诺大爆发,也曾导致加拿大经历了一次极其险峻的火警季节。

弗兰尼根表示:“厄尔尼诺使北半球的气候变得温暖和干旱。冬天是这样,春天还是这样。我敢打赌,今年夏天的火情也不容乐观。”

大火一旦蔓延到城镇,后果将不堪设想。麦克莫里堡曾经是加拿大的焦油砂重镇,可是今年的油价暴跌却让整个城市陷入一片萧条,而
按照以往的大火损失统计方式来看,预计这次麦克莫里堡大火的代价可能高达数亿美元。

此外,类似这样的森林大火也会对全球气候造成破坏。全球陆地碳储存中,有近30%都集中在北方针叶林地区。一旦这些地方着火,将会向大气输送大量的碳,最终导致全球变暖。严重的森林大火曾经让某些林区成了当年碳污染的罪魁祸首,一切就好像变成了一个循环,火灾带动全球气温上升,进而增加森林火险可能。

科学家们还对艾伯塔省和加拿大北部针叶林中储存的大量泥煤表示了担忧。泥煤的碳含量很高,一旦引燃就很难扑灭,闷烧时间短则几周,长则几个月,有时甚至可以跨过冬天,在春季重新复燃。

这样一来,生活在森林中仿佛变成了一件危险的事情。而且,森林火情还会蔓延到其他地区。

Friday, September 14, 2018

ने ताजमहल के निर्माण के दौरान काम किया

बातचीत में राव स्वीकार करते हैं कि शहर के नाले और शहर के घरों से निकल रहा कचरा ही ताज को हो रहे नुकसान का बड़ा कारण है. वो कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने कई दलों का गठन किया है जो कचरे के बेहतर प्रबंधन का काम कर रहे हैं. इसके अलावा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए गए हैं जो मल और गंदगी को यमुना में जाने से पहले ही साफ़ कर दें. उन्होंने कहा, “इसके अलावा आगरा को हम स्मार्ट सिटी बनाने वाले हैं जिससे ये समस्याएं हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएँ
स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव में आगरा के चारों तरफ पेड़ लगाने की बात कही गई है जिससे रेगिस्तान को आगे बढ़ने से रोका जा सके. ये बातें सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर विज़न डाक्यूमेंट में भी कहीं हैं.
मगर आगरा के लोग इसका विरोध कर रहे हैं. उनका मानना है कि जो शहर धरोहर मान लिया जा चुका है उसे स्मार्ट सिटी बनाना ग़लत है. ऐसा करने से वो शहर अपने धरोहर होने की पहचान खो बैठेगा. खंडेलवाल कहते हैं कि धरोहर को अगर बचा लिया जाएगा तो बाक़ी की चीज़ें भी अपने आप बच जाएँगी.
आगरा तीन हिस्सों में बँटा हुआ है– एक मुग़ल कालीन आगरा, दूसरा बृज भूमि और तीसरा ब्रिटिश आगरा. इन तीनों की अपनी अलग-अलग पहचान है. तीनों किसी न किसी धरोहर का हिस्सा हैं. इसलिए इस पूरे इलाके का संरक्षण अपने आप में बड़ी चुनौती है.
इतिहासकार मानते हैं कि अगर अंग्रेज़ों ने आगरा से काफी कुछ लूटा था तो उन्होंने ताज महल को काफी कुछ दिया भी है. मसलन, आज जो मुख्य द्वार है उससे अन्दर दाख़िल होते हे जो फ़व्वारे और रेतीले लाल पत्थर हैं, उनका निर्माण लार्ड कर्ज़न ने कराया था. कुछ इतिहासकार कहते हैं कि अगर अंग्रेज़ न होते तो शायद ताज महल को काफी ज़्यादा नुकसान पहुंचा होता. उन्होंने 1920 के आस-पास से ही ताज महल और दूसरे धरोहरों का संरक्षण शुरू कर दिया था.
ऐसे कई शिलालेख मौजूद हैं जो इस बात को साबित करते हैं. जगंज ताजमहल की सीमा के अंदर ही बसा हुआ है. ये वो इलाक़ा है जहां ताजमहल को तामीर करने वाले फनकार रहा करते थे. अब उनके वंशज यहाँ रहते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने ताजगंज के रहने वाले हर व्यक्ति को जीता जागता धरोहर मान लिया है.
यहाँ के मकान और यहाँ के लोग – सभी ताज महल के जैसे ही धरोहर हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट की इस मान्यता से लोग इसलिए खुश नहीं हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि संरक्षण के नाम पर जो कानून बनाए गए हैं, बाबुओं ने वो सब सिर्फ ताजगंज पर थोप दिए हैं.
संदीप अरोड़ा इनमें से एक हैं. वो कहते हैं कि धरोहर के नाम पर अगर उनके घर का कमोड भी टूटता है तो वो उसे बिना इजाज़त बनवा नहीं सकते. वो डीजल के जेनरेटर नहीं लगा सकते जबकि आगरा शहर के बड़े होटलो में बड़े-बड़े डीज़ल जेनरेटर लगे हुए हैं.
वो कहते हैं “सुप्रीम कोर्ट ने डीज़ल के वाहनों पर पाबंदी लगाई है. मगर ताजगंज के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पास की व्यवस्था करने को कहा है जिससे यहाँ रहने वालों को कोई तकलीफ़ नहीं हो. मगर हमने यातायात विभाग से जानकारी जुटाई तो पता चला कि यहाँ के लोगों को 170 पास दिए गए हैं जबकि प्रशानिक अधिकारियों, नेताओं और उनके रिश्तेदारों को 5000 से भी ज्यादा पास बाँटे गए हैं. वो डीज़ल की गाड़ियों से ताजमहल के दरवाज़े तक आते हैं जबकि ये प्रतिबंधित है.”
संदीप के अनुसार जो पर्यटक विदेश से आते हैं वो ज्यादा पैसे देते हैं मगर उन्हें सुविधा कुछ नहीं मिलती. जो तकलीफ़ वो उठाते हैं तो फिर दोबारा नहीं आने के प्रण के साथ लौट जाते हैं.
गी.”
इसको बचाने के अलग-अलग तरीक़े सुझाए जाते हैं. कोई हेरिटेज सिटी बनाने से मामले का हल देखता है तो कोई यमुना में पानी के आ जाने और कचरा साफ़ करने से.
मगर इमारत को कैसे बचाया जाए इस पर अभी तक शोध चल रहा है. हालाँकि इसकी मरम्मत समय-समय पर होती रहती है. मगर जिस तरह से मरम्मत हो रही है वो सवाल खड़े करती है.
आगरा गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष शम्सुद्दीन कहते हैं कि ताजमहल कैसे बचेगा, ये ताजगंज का बच्चा-बच्चा जानता है. सिर्फ अधिकारी ही नहीं जान पाए हैं.
शम्सुद्दीन ने अपनी उम्र में पचास राष्ट्राध्यक्षों को ताज महल में बतौर गाइड घुमाया है जिसमे श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति जयवर्धने से लेकर इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू तक शामिल हैं.
उनका कहना है, “यहाँ पर एक बड़ी जमात है जिसको हम पच्चीकार कहकर बुलाते हैं. यही वो लोग हैं जिनके पूर्वजों ने ताजमहल के निर्माण के दौरान काम किया था. ये हस्तशिल्प कलाकार हैं जो वही नक्काशी करते हैं जो आपको ताजमहल में देखने को मिलेगी. ताज महल को बचाएगा कौन ? नस्ल ही तो बचाएगी. मगर सरकार ने इनकी कला को संरक्षित करने या फिर दूसरे लोगों को ये कला सिखाने की कोई पहल नहीं की है.”
इन तमाम चर्चाओं के बाद पुरातत्व वैज्ञानिक आरके दीक्षित कहते हैं कि जिस दिशा में ताजमहल का संरक्षण जा रहा है,अफ़सोस होगा कि आने वाली नस्लों के लिए कुछ नहीं बचेगा क्योंकि समय तेज़ी से निकल रहा है.
वर्ष 1984 से अदालत में लड़ने वाले वकील एमसी मेहता को नहीं लगता कि ताज महल को बचाने की दिशा में अब कुछ हो पाएगा. इसकी संभावनाएं अब नहीं के बराबर ही हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अब 22 साल हो गए हैं.
मेहता कहते हैं, "पहली चुनौती है कि ये विश्व धरोहर बना रहे क्योंकि यूनेस्को की टीम ऐसी इमारतों का अवलोकन करती रहती हैं और ताज महल तेज़ी से इस पायदान से नीचे उतरता जा रहा है. दूसरी चुनौती है कि वो दुनिया के सात अजूबों में से एक बना रहे. अब इसकी भी संभावनाएं कम होती चली जा रहीं हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है और जिसके लिए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश की सरकार और पुरातत्व विभाग ज़िम्मेदार हैं."
एम सी मेहता का कहना है: "मेरी लड़ाई 1984 से भी पहले की है. 1984 में तो मैंने याचिका डाली थी. दिल्ली से लेकर बटेश्वर तक यमुना के किनारे पर हमारी ऐतिहासिक धरोहर बसती है - चाहे वृन्दावन हो या आगरा. ताज महल पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला 1996 में आया. ये फ़ैसला अपने आप में ताज महल के संरक्षण का 'रोड मैप' है. सरकार अगर फ़ैसले पर अमल करती तो आज स्थिति इतनी ख़राब नहीं होती."
उनका कहना है कि ताज महल ज़मींदोज़ होने या गिर जाने से बच जाए; यही सबसे बड़ी उपलब्धि होगी. जिस तरह ताज की नींव कमज़ोर होती जा रही है और जिस तेज़ी के साथ मुख्य इमारत में दरारें पड़ रहीं हैं, वो दिन दूर नहीं है जब ताज महल सिर्फ इतिहास में सिमटकर रह जाएगा. इसे बचाने के लिए वक़्त हाथों से निकल चुका है. ख़ुद मेहता को भी यही उम्मीद है कि उनकी बात सही साबित न हो.

Monday, September 10, 2018

वरिष्ठ परकार जयप्रकाश चौकसे का कहना है कि

,"बॉक्स ऑफ़िस फ़िल्म इंडस्ट्री में रिश्ते तय करता है. सब अपना फ़ायदा देखते है और फ़िल्म इंडस्ट्री का अंदरूनी सिद्धांत है कि कम बोलना चाहिए."
ट्रेन, जेल जैसी फ़िल्मों में छोटे किरदार कर चुकी पूर्व मिस इंडिया सयाली भगत ने 2011 में एक स्टेटमेंट जारी किया था जिसमें उन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री के शाइनी आहूजा, आर्य बब्बर, साजिद ख़ान सहित और कई बड़े कलाकारों पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे.
इस मामले में बाद में अमिताभ बच्चन ने पुलिस का सहारा लिया और तब यह मामला साइबर क्राइम का निकला. सयाली भगत ने अपने आप को साइबर क्राइम की शिकार बताते हुए सभी दिग्गजों से माफ़ी मांगी और कहा कि उनके पूर्व पब्लिसिस्ट ने बिना उनकी रज़ामंदी के ये बयान जारी किया जिससे वो बहुत शर्मिंदा हैं.
उन्होंने अपने पूर्व पब्लिसिस्ट के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई, हालांकि इसके बाद फ़िल्मों में काम के लिए संघर्ष कर रही सयाली भगत का नाम कम ही सुना गया.
अनुराग कश्यप एक समय में सोशल मीडिया पर काफ़ी बेबाक चीज़ें लिखा करते थे. अपनी फ़िल्मों की तरह वो भी बेबाकी से फ़िल्म इंडस्ट्री के दिग्गजों के बारे में बोल देते थे. उनके बड़े भाई अभिनव कश्यप ने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत सलमान ख़ान की फ़िल्म दबंग से की.
फ़िल्म को सफलता मिली. जब दूसरे भाग के निर्देशन की बात आई तो कथित तौर पर अरबाज़ ख़ान और अभिनव कश्यप के बीच कुछ अनबन हुई और अभिनव फ़िल्म दबंग 2 के निर्देशन से बाहर हो गए.
इस घटना पर भाई अनुराग कश्यप और अरबाज़ ख़ान के बीच ट्विटर पर कहा-सुनी भी हुई. हालांकि अनुराग कश्यप के करियर पर इसका कोई असर नहीं हुआ, लेकिन उनके भाई अभिनव कश्यप की 2013 में रणबीर कपूर के साथ आई फ़िल्म बेशरम फ़्लॉप रही. बतौर निर्देशक विफल होने के बाद फ़िलहाल अभिनव कश्यप का निर्देशन करिअर रुक-सा गया है.
छह साल की उम्र में टेनिस खिलाड़ी पीट सैम्प्रास को विंबलडन जीतते देख नोवाक जोकोविच ने फ़ैसला किया था कि टेनिस ही उनका खेल है.
आज जोकोविच का मैदान वही था जहां 16 साल पहले उनके आदर्श खिलाड़ी पीट सैम्प्रास ने अपना 14वां ग्रैंड स्लैम जीता था.
संयोग देखिए कि फ़्लशिंग मेडोज़ के कोर्ट पर जोकोविच ने भी यूएस ओपन जीतकर 14वां ग्रैंड स्लैम ख़िताब अपने नाम कर लिया.
जोकोविच ने यूएस ओपन मुक़ाबले में अर्जेंटीना के जुआन मार्टिन डेल पोट्रो को हराकर अपने करियर का 14वां ग्रैंड स्लैम ख़िताब जीता.
जुलाई में विंबलडन 2018 का ख़िताब जीतने के बाद इस दूसरी ग्रैंड स्लैम जीत ने उन्हें विश्व में नंबर चार खिलाड़ी बना दिया है.
ये जोकोविच का तीसरा यूएस ओपन ख़िताब है. जोकोविच ने तीन साल पहले 2015 में यूएस ओपन फ़ाइनल में रोजर फ़ेडरर को हराकर ख़िताब जीता था.
उनसे ज़्यादा ग्रैंड स्लैम रोजर फ़ेडरर (20) और रफ़ाएल नडाल (17) के नाम हैं. स फ़ाइनल में उनके प्रतिद्वंद्वी डेल पोट्रो आखिरी बार 2009 में यूएस ओपन जीते थे और उसके बाद ये उनका पहला ग्रैंड स्लैम मुक़ाबला था. कई चोटों के बाद ऐसा लग रहा था कि 2015 में डेल पोट्रो टेनिस छोड़ देंगे.
इस मुक़ाबले में पहला सेट जोकोविच ने बेहद आसानी से 6-3 से जीत लिया.
लेकिन दूसरे सेट में डेल पोट्रो ने उन्हें कड़ी चुनौती दी. दूसरे सेट में मुक़ाबला अंतिम पलों तक रोमांचक रहा और सेट का नतीजा टाई ब्रेकर के ज़रिए सामने आया. डेल पोट्रो ने अच्छा संघर्ष जरूर किया, लेकिन ये सेट भी जोकोविच ने 7-6 (7-4) से अपने नाम कर लिया और आखिरकार जोकोविच 6-3 7-6(7-4) 6-3 से विजयी हुए.
सर्बिया के 31 साल के जोकोविच उन आठ पुरुष खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने विंबलडन और यूएस ओपन दोनों जीते हैं और जोकोविच ने ये तीसरी बार कर दिखाया है.
जीत की खुशी ऐसी थी कि जोकोविच टेनिस कोर्ट में कमर के बल निढाल होकर गिर पड़े. अपने विपक्षी डेल पोट्रो से गले लगने के बाद जोकोविच बॉक्स में अपनी पत्नी और टीम के साथ खुशी मनाने के लिए पहुंच गए.
वहीं डेल पोट्रो अपने आंसू रोक नहीं पाए. उन्होंने कहा, "अभी मेरे लिए बात करना आसान नहीं है. मैं उदास हूं अपनी हार पर, लेकिन मैं नोवाक के लिए खुश हूं."
जोकोविच के लिए ये जीत इसलिए भी ख़ास थी क्योंकि 2016 फ्रेंच ओपन के बाद से ही वे एक बड़ी जीत की तलाश में थे जो इस साल विंबलडन जीतने के साथ शुरू हुई.
कोहनी की चोट और साथ ही अपनी निजी परेशानियों के चलते आठ ग्रैंड स्लैम उनके हाथ से निकल गए जिनमें वे सिर्फ़ सेमीफाइनल तक ही पहुंच पाए थे.